कानपुर:सांग पूजा के साथ चैत्र नवरात्र में जगत जननी का श्रद्धालु ले रहे आशीर्वाद

वर्ल्ड खबर एक्सप्रेस न्यूज
कानपुर, 12 अप्रैल । चैत्र नवरात्र के सातवें दिन सप्तमी व अष्टमी पूजन का अद्भुत संयोग बना। जिसके चलते माता के गौरी व कालरात्रि स्वरुप की पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों का मंदिरों में तांता लगा। इसके साथ ही सांग पूजन के जुलूस माता की प्रसन्न करने के लिए बारादेवी मंदिर पहुंचने लगे है। जिसके चलते जूही बारादेवी की ओर जाने वाले रास्ते पर चैपहिया वाहनों की आवाजाही रोक दी गई है।
जनपद के घाटमपुर स्थित कुष्मांडा देवी, बारा देवी मंदिर व बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी देवी मंदिरों में शुक्रवार को भारी भीड़ उमड़ी। जूही स्थित बारादेवी मंदिर में भोर के समय से ही श्रद्धालुओं की भीड़ पहुंचने लगी। श्रद्धालुओं ने माता के चरणों में पुष्प अर्पित कर लाल चुनरी, नारियल, फल, मिष्ठान, सिन्दूर, रोली के साथ विधि-विधान से पूजा की।

इस दौरान मंदिर परिसर जय माता दी के उद्घोष से गुंजायमान रहा। बारादेवी मंदिर की प्राचीनता के चलते यहां पर जनपद के साथ ही आसपास के क्षेत्रों व जिलों से भारी संख्या में श्रद्धालु नवरात्र में माता का आशीर्वाद लेने के लिए आते हैं। इस दौरान यहां पर भव्य मेला का आयोजन भी होता है। जो काफी आकर्षक होता है और प्रसाशन व पुलिस के द्वारा आने वाली भीड़ को संभालने के लिए पुख्ता बंदोबस्त किये जाते हैं।

इसी तरह घाटमपुर के कुष्मांडा देवी व बिरहाना रोड स्थित तपेश्वरी माता मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। मंदिरों में भीड़ का आलम यह था कि श्रद्धालुगण हाथों में पूजा की सामग्री, फूल, नारियल इत्यादि लेकर माता की एक झलक पाने के लिए घंटों कतारबद्ध लगे रहें। इसके साथ ही अन्य माता के मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की पूजा अर्चना का दौर अनवरत चलता रहा।

सांग पूजा के लिए श्रद्धालुओं के निकल रहे जुलूस
नवरात्र के अवसर पर जनपद में माता को प्रसन्न करने के लिए विशेष सांग पूजा का महत्व है। सप्तमी अष्टमी से शुरु होकर नवमी तक श्रद्धालुओं के सांग जुलूस निकलना जारी रहते हैं। सांग पूजा में श्रद्धालुओं द्वारा भारी भरकत वजनी त्रिशूल, भाला इत्यादि मुंह में माता को प्रसन्न करने के लिए लगाया जाता है।

इसके साथ ही शरीर पर हजारों सुईयों को भी पीठ, जीभ आदि में लगाकर भक्तगणों का जुलूस माता के मंदिरों तक पहुंचता है। मंदिरों में पहुंचने पर भक्ती की इस कठिन परीक्षा से गुजरने वाले भक्त की पुजारी द्वारा पूजा के बाद सांग निकाले जाते हैं। हैरत की बात यह है कि शरीर पर इन नुकीलें औजारों को लगाने के बाद भक्त के न ही खून निकलता है और उसे निकालने के बाद शरीर पर निशान ही दिखता है।

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