कानपुर: कोरोना पर फीका रहा बकरीद का त्योहार, घरों में अदा की गई नमाज

कानपुर: कोरोना पर फीका रहा बकरीद का त्योहार, घरों में अदा की गई नमाज

– सामूहिक रुप से मस्जिदों में नहीं पढ़ी गयी ईद उल अजहा की नमाज
– कोरोना के खौफ के चलते लोग एक-दूसरे से गले मिलने से भी किये परहेज

कानपुर, 01 अगस्त । कोरोना महामारी का प्रकोप बीते महीनों से सभी धर्मों के त्योहारों पर पड़ रहा है और इसी क्रम में आज ईद-उल-अजहा का भी त्योहार शहर से लेकर ग्रामीण तक फीका रहा। मस्जिदों में सामूहिक रुप नमाज नहीं अदा की गयी सिर्फ मौलवियों ने ही नमाज अदा की और लोगों ने अपने घरों पर नमाज अदा कर देश से कोरोना महामारी को भगाने के लिए दुआएं की गयी। कोरोना वायरस की वजह से पहली बार नमाज अदा करने के बाद गले लगाकर बकरीद की बधाई लोग नहीं दे सके।

देश भर में आज ईद-उल-अजहा (बकरीद) का त्योहार मनाया जा रहा है। वैश्विक महामारी कोरोना को देखते हुए ज्यादातर लोगों ने घरों पर रहकर नमाज पढ़ी तो कुछ लोग मस्जिदों में भी पहुंचे। लेकिन यहां पर सामूहिक रुप से नमाज नहीं अदा की जा सकी, सिर्फ मौलवियों ने ही नमाज अदा कर लोगों को घरों पर रहकर नमाज अदा करने की अपील की गयी। इस बार बकरीद के त्योहार पर मुस्लिम समुदाय में ज्यादा खुशी देखने को नहीं मिली और यूं कहें कि बकरीद का पर्व इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते फीका रहा। यही नहीं महामारी के डर से बकरीद के दिन भी लोग एक दूसरे से गले नहीं मिले और हाथ मिलाकर भी मुबारकबाद देने से परहेज किया।

इसके साथ ही इस बार ईदगाह पर एवं जगह-जगह लगने वाले छोटे छोटे मेले भी नहीं लग सके, जिससे बच्चे खेल खिलौने न खरीद पाने से मायूस रहे। बकरीद के दिन गुलजार रहने वाली सड़के और गलियों में भी अबकी बार सन्नाटा पसरा रहा। वहीं पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से मुस्तैद रहा है कि शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कराया गया। मस्जिदों व सामूहिक स्थानों पर पुलिस का सख्त पहरा रहा।

कुर्बानी पर भी दिखा असर

ईद उल अजहा की नमाज के बाद लोग जानवरों की कुर्बानी देते हैं, पर अबकी बार कुर्बानी भी फीकी रही। ज्यादातर लोग कुर्बानी में होने वाले खर्च को गरीब की बेटियों की शादी में देने का फैसला लिये। इसी के चलते अबकी बार जानवरों की खरीददारी भी अन्य वर्षों की अपेक्षा कम रही। बताते चलें शहर काजी आलम रजा नूरी ने अपील की थी कि एक कुर्बानी में परिवार के सभी सदस्य शामिल हो जाएं और कुर्बानी में जो खर्च आ रहा हो उसको दूसरों की सहायता में खर्च करें।

सेवइयां सहित बने पकवान

लोगों ने बकरीद के मौके पर लजीज व्यंजन का मजा लिया। घरों पर गृहणियों ने परिवार के सदस्यों व अतिथि के लिए रात भर जाग कर विभिन्न प्रकार के सेवइयां, सिरमाल, छोले-भटोर आदि व्यंजन भी थाली में परोसा गया। बच्चों की मांग पर पकवान बनाने में महिलाएं व्यस्त रहीं।

सोशल मीडिया पर दी मुबारक बाद

इस बार शारीरिक दूरी का पालन करते हुए लोगों ने एक-दूसरों को बकरीद की मुबारकबाद दी। बहुत सारे रिश्तेदारों के घर भी नहीं जा सके। बकरीद में लोग महामारी से निजात दिलाने की दुआ की। सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे को बकरीद की बधाई दी। कई लोग दूसरे प्रदेशों से घर नहीं लौट सके। इसके लिए वीडियो कॉल के माध्यम से स्वजनों व दोस्तों को बधाई दी।

सुरक्षा को लेकर मुस्तैद रहा प्रशासन

बकरीद की सुरक्षा को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए। सुरक्षा बल लगातार गश्त लगा रहे थे। मस्जिदों व ईदगाहों के पास विशेष चौकसी बरती गई। मस्जिदों के बाहर पुलिस तैनात रही। चौक-चौराहों पर भी पुलिस व मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई थी। प्रशासन व उलेमाओं की अपील का माकूल असर बकरीद के त्योहार पर दिखा।

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