कोरोना काल में मोबाइल कंपनियों ने बढ़ाएं दाम, ग्राहकों की जेब हुई ढीली

कोरोना काल में मोबाइल कंपनियों ने बढ़ाएं दाम, ग्राहकों की जेब हुई ढीली

ग्राहकों के लिए किराना से बढ़कर मोबाइल व टैबलेट हुआ आवश्यक

कोरोना काल मे जीएसटी की मार से मोबाइल की दरों में आई उछाल

कानपुर, 20 जुलाई । भारत मे कोरोना महामारी तेजी से पैर पसार रहा है। तो वहीं भारत और चाइना के बीच हुए विवाद में चाइना के उत्पादों पर रोक लगा दी गयी है। जिससे मोबाइल प्रेमी ग्राहकों को मोबाइल एसेसिरिज का उपयोग करना महंगा पड़ रहा है। कोरोना काल में मोबाइल कंपनियों ने बढ़ाएं एसेसीरीज के दाम।

टेलीकॉम क्षेत्र में भारतीय-अमेरिकी व कोरियाई कंपनी का दबदबा बढ़ता जा रहा। मोबाइल बाजार में ग्राहकों की कमी देखी जा सकती है। कोरोना महामारी के बढ़ने से सप्ताह में चार दिन मार्केट खुलने पर मोबाइल व्यापार को एक बड़ा झटका लगा है। व्यापारियों की माने तो अभी लॉक डाउन से अनलॉक में आये थे। कि अनलॉक में लॉक डाउन छोटा पैक लागू होने से व्यापारिक परिस्थितियों में काफी बदलाव संग महगांई आयी है।

कोरोना महामारी के बढ़ने के चलते सिंघवानी टेलीकॉम के मालिक सुरेश सिंघवानी ने बताया कि हमारे पास आने वाले हर ग्राहक की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है जिससे वह किसी प्रकार से भी कोरोना का शिकार न हो। सुरेश का कहना है कि कोरोना काल में देखा जाए तो किराना से ज्यादा मोबाइल जरूरी हो गया।

क्योंकि व्यापार के साथ- साथ बंद चल रहे स्कूलों में अब ऑनलाइन पढ़ाई करवाई जा रही। जिससे इस समय सबसे ज्यादा मोबाइल व टैबलेट की मांग आ रही है। ग्राहक तो बाजार में घूम रहा है लेकिन कम्पनियों के पास माल ही नहीं जिससे मोबाइल की जरूरतों को पूरा कर सके। उन्होंने बताया कि ज्यादातर चाइनीज कम्पनियों ने मोबाइल की दरों को बढ़ा दिया है .

जिनमे कि रियल मी, वीवो, ओप्पो, एम आई व वन प्लस कंपनी जुड़ी हैं। तो इंडियन कम्पनी में लावा व माइक्रोमैक्स माल ही नहीं दे पा रही है। कोरियाई व अमेरिकी की मोबाइल कम्पनियों में सैमसंग व एप्पल ने अपने दाम न बढ़ाकर केवल सिर्फ जीएसटी को ही बढ़ाया है। मोबाइल ख़रीदने वाले ग्राहकों व छात्रों को मोबाइल की पुरानी कीमत की दर से अधिक देना पड़ रहा है। छात्र व छात्राओं में सबसे ज्यादा मोबाइल की मांग आ रही है क्योंकि ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो चुकी है और अब उनके लिए मोबाइल फोन प्राथमिकता बन चुका है।

गणपति ट्रेडर्स के मालिक शोभित रस्तोगी का कहना है कि जब से चाइना का विवाद हुआ तब से कई चाइनीज कम्पनियों के मोबाइल फोन की मांग और बढ़ गई है। जिससे अब मार्केट में फोन की कमी नजर आ रही है। मोबाइल मार्केट में आई तेजी से उछाल का कारण अप्रैल से बढ़ाई गई जीएसटी दर है। क्योंकि पहले जीएसटी 12þ थी । अब 18þ वसूली जाती है। जिससे अब मोबाइल खरीदने वालों को पुराने दर की अपेक्षा अधिक लागत लगानी पड़ रही।

सबसे ज्यादा ग्राहक स्टूडेंट्स होते है क्योंकि लॉक डाउन के घोषित होने के बाद से सभी विद्यालयों में पढ़ाई ऑनलाइन के माध्यम से की जा रही है। जिससे बच्चों की जेबों पर असर दिख रहा है। इस कोरोना महामारी में आर्थिक व्यवस्था चरमा गई है। जिससे लोग नकद भुगतान की वजह अन्य निजी कम्पनियों के द्वारा किये जा रहे फाइनेंस की ओर रुख कर है।

इससे फोन की कीमत चुकाने के लिए ग्राहकों को ज्यादा समय मिल जाता है। शोभित का कहना है कि एमआई नोट-9 प्रो मैक्स एक ऑनलाइन प्रोडक्ट है जो कि 18000 का है। इसे मार्केट में ग्राहकों की मांग होने पर मय जीएसटी पर 21000 तक में भी बेचा जा रहा है।

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