कोरोना ने फीकी की कानपुर के पेठे की मिठास, बिक्री में आई भारी गिरावट

कोरोना ने फीकी की कानपुर के पेठे की मिठास, बिक्री में आई भारी गिरावट

— तीन पीढ़ी से पेठा व्यावसाय से जुड़े परिवार का काम हुआ आधा

— जिले के अलावा आसपास के कई जनपदों में पेठा का कारोबार है फैला, गर्मी में होती है खासी मांग

कानपुर, 21 जून । उत्तर प्रदेश में आगरा के बाद पेठा के मामले में कानपुर भी जाना जाता है। यहां पर पेठा व्यवसाय बड़े पैमाने पर होता है और कई जनपदों में इसकी मिठास के लिए यह मशहूर है। लेकिन बीते तीन माह की बात की जाए तो कोरोना महामारी ने कानपुर में इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए पेठे की मिठास को फीका कर दिया है। बिक्री न होने के कारण अनलॉक में भी दुकानदार हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। दुकानदारों को इस सीजन में काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

आगरा का पेठा जहां देश और दुनिया में अपनी वैरायटी के लिए जाना जाता है तो ओद्यौगिक नगरी कानपुर में प्यार की नगरी से पीछे नहीं है। यहां पर भी काफी बड़े स्तर पर पेठा तैयार किया जाता है और एक बड़ा वर्ग इस व्यवसाय आसपास जनपदों में जुड़ा हुआ है। यहां के पेठा गर्मियों में लोगों की पसंद हुआ करता है। घर हो या दुकान, सरकारी हो गैर सरकारी कार्यालय वहां काम करने वाले लोग गर्मी की तपीस में पेठा खाना के साथ पानी पीकर गले की तरावट व मन में पेठे की मिठास का लुफ्त उठाना नहीं भूलते। लेकिन इस मिठास पर कोरोना महामारी जैसी आपदा का गहरा असर पड़ा है।

लॉक डाउन के चलते लोगों से दूर हुआ पेठा प्रेम
कोरोना महामारी के चलते देश में मार्च से लॉक डाउन लिया गया। लॉक डाउन के बाद से ही कानपुर की मिठास, पेठा भी लोगों से दूर हो गया। पेठे की बिक्री पूरी तरह से खत्म हो गई और इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। अनलॉक—1 में भले ही दुकानें खुल गई हैं, लेकिन अभी भी लोग पेठे की खरीददारी करने में हिचकिचा रहे हैं। बाजार में मांग न होने से गर्मी में इसकी बिक्री न के बराबर है और व्यावसाय से जुड़े लोगों की न लागत निकल पा रहा और न ही कारीगरों को ही उनका पारश्रमिक मिल पा रहा है। ज्यादातर कारीगर घरों में बैठे हैं।

स्वागत सत्कार के लिए पेठा से अच्छा कुछ नहीं


कानपुर, आसपास के क्षेत्रों व जिलों में गर्मी के दिनों में आज भी मेहमानों का मुंह मीठा पेठे से ही होता है। गर्मी का मौसम आते ही घरों में मेहमानों के लिए यह स्वागत करने के लिए लोगों सबसे अच्छा तरीका भी होता है। इसमें आमतौर पर लोगों के घर में सबसे ज्यादा बाहर से आने वालों के वेलकम की शुरुआत पेठा व पानी से कराई जाती है।

इसलिए यह लोगों की सर्वप्रथम पसंद भी बन जाता है। इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि निम्न वर्ग हो या उच्च, सभी के घरों में पेठा खिलाए जाने का एक रिवाज से बन जाता है या यूं कहे कि अतिथि स्वागत का बेहतर प्रचलन चलने लगाता है। इस स्वागत सत्कार में पेठों की कई तरीके की वैरायटी आनंद को दोगुना कर देती है।

कोविड के चलते पेठा व्यावसाईयों की समस्या


पेठा व्यावसाय से जुड़े कानपुर में आगरा पेठा स्टोर के मालिक रामशंकर गर्ग ने बताया कि हमारे प्रतिष्ठान में कोविड—19 से जुड़ी हर बात का विशेष ध्यान में रखते हुए हम अपने ग्राहकों को संतुष्ट कर रहे है। उन्होंने बताया कि हमारी तीन पुश्ते इस पेठे के व्यापार करते हुए बीत गई हैं।

उनकी इस दुकान की शुरुआत उनकी पिता स्व. ईश्वरी प्रसाद गर्ग ने एक छोटी सी दुकान से की थी और आज हम उसी व्यापार को आगे बढ़ाते हुए पेठे की वैरायटियों में उतर आये हैं। आज हमारे पास अंगूरी पेठा, खोया गिलोरी पेठा, पान गिलोरी पेठा, कंचा पेठा, चेरी पेठा और साथ ही गरी पेठा का भी उत्पादन करते है। जिसमें सर्वाधिक चेरी पेठा ही बिकता है।

हमारे यहां से फतेहपुर, बांदा, चित्रकूट और उन्नाव जिले के ग्राहक हमारे पास आते हैं। उनका कहना है कि कोविड—19 के कारण हमारी दुकानदारी पिछले वर्ष की अपेक्षा आधी ही रह गयी है। पहले होली के बाद से पेठा बाजार में मांग बढ़ने लगती थी और करीब 10 कुंतल से अधिक बिक्री होती थी, कोरोना महामारी के बाद अब वो घट कर 200 किलो के लगभग रह गई है। इस महामारी से व्यावसाय चलाना मुश्किल हो गया है।

व्यावसाय को आगे बढ़ने के लिए तीसरी पीढ़ी ने किया एमबीए


पेठा व्यावसायी रामशंकर गर्ग के बेटे सात्विक गर्ग ने बताया कि मेरे एमबीए की पढ़ाई करने का मकसद अपने दादाजी के द्वारा शुरू किया गया पेठा व्यापार को आगे बढ़ाना है जिससे कि हम अपने आने वाले ग्राहकों की पसंद, नापसंद को बेहतर समझ सके। साथ ही पेठे की नई वैरायटी को मार्केट में ला सकें जिसमें कि पेठे के शौकीन हमारे पास से निराश होकर ना जाए। लेकिन इन दिनों कोविड—19 के चलते व्यापार काफी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। सत्विक ने बताया कि आपदा से हम हारे नहीं है, व्यापार में आने वाले दिन केन्द्र सरकार की नीतियों व उठाए जाने रहे निर्णयों (राहत पैकेज) के चलते जल्द ही पटरी पर लौट रहे हैं और इसके बेहतर परिणाम भी सामने आने लगे हैं।

पेठा का भाव

चेरी पेठा-70 रुपये

अंगूरी पेठा-140 रुपये

कंचा पेठा-160 रुपये

गरी पेठा-160 रुपये

पान गिलौरी पेठा-300 रुपये

खोया गिलौरी पेठा-300 रुपये

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