पुलवामा हमला : सरकार ने शहीदों के आश्रितों को दिया सहारा, दर्द बरकरार

पुलवामा हमला : सरकार ने शहीदों के आश्रितों को दिया सहारा, दर्द बरकरार

– शहीद श्यामबाबू और प्रदीप की पत्नी को मिली सरकारी नौकरी
शहीद जवानों को याद कर दी गयी श्रद्धांजलि
– परिजनों ने अन्य सुविधाओं को लेकर सरकार पर लगाया वादा खिलाफी का आरोप

कानपुर, 14 फरवरी। आज से ठीक एक साल पहले जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आतंकी हमला हुआ था और कानपुर मण्डल के दो सीआरपीएफ के जवान शहीद हो गये थे। शहीदों की शहादत पर दोनों जवानों के गांवों में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किये गये और लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान जवानों की याद पर नारे भी लगाये गये और देश के लिए शहीद होने पर गर्व भी किया गया। वहीं शहीद जवानों के परिजनों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। कहा गया कि गांव में शहीद के नाम पर एक पार्क बना और न ही सड़क।

पुलवामा हमले में कानपुर देहात जनपद के डेरापुर तहसील के रैंगवा निवासी राम प्रसाद के बड़े बेटे श्याम बाबू 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। इसी तरह कन्नौज जनपद के तिर्वा तहसील क्षेत्र के ग्राम सुखसेनपुर अजान निवासी प्रदीप सिंह यादव पुलवामा हमले में शहीद हो गए थे। दोनों की शहादत पर आज उनकी पहली बरसी पर पैतृक गांवों में उनकी स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किये गये।

दोनों गांवों में लोगों ने शहीदों को याद करते हुए नमन किया और अमर रहे के नारे लगाये। शहीद जवान श्याम बाबू के पिता ने कहा कि मुझे फक्र है कि मेरा बेटा देश की सेवा करते हुए अपने को न्योछावर कर दिया, लेकिन सरकार ने जो वादा किया था वह पूरा नहीं हो रहा। पत्नी रुबी ने बताया कि सरकार ने मुझे नौकरी तो दे दी पर गांव में पानी की टंकी, सड़क पति के नाम से बनवाने का जो वादा किया था वह आज तक पूरा नहीं हुआ। इसी तरह शहीद प्रदीप यादव की पत्नी नीरजा देवी ने कहा कि मेरे भरण पोषण के लिए नौकरी मिल गयी है।

लेकिन शहीद का जो सम्मान होना चाहिये वह नहीं मिल पा रहा है, अभी तक गांव में शहीद के नाम मुख्य द्वार भी नहीं बना। यहां तक थानाध्यक्ष भी सम्मान नहीं करते और बताया कि जब आज श्रद्धांजलि सभा कार्यक्रम की अनुमति लेने थाना गयी तो उन्होंने मना कर दिया। जिसके बाद जिलाधिकारी ने अनुमति दी और हर संभव मदद का आश्वासन दिया।

गांव में भी नहीं हैं पापा
शहीद श्याम बाबू का पांच वर्षीय बेटा आयुष अपनी मां रुबी से अक्सर यह सवाल करता था कि पापा अब हमसे क्यों नहीं बात करते और कब तक आएंगे। इस पर अकबरपुर में नौकरी कर रही शहीद की पत्नी यह कहकर टाल देती थी कि पापा गांव में हैं। आज पहली बरसी पर जब रुबी बच्चों को लेकर गांव पहुंची तो तुतलाते हुए बेटे ने कहा कि मम्मी गांव में भी पापा नहीं है। बेटा ने कहा कि पापा कहते थे कि पढ़ने जाओ अच्छे बने तो अब तो मैं पढ़ने भी जा रहा हॅूं और अच्छा भी हो गया हॅूं। पापा हमसे क्या गुस्सा है इसीलिए नहीं आ रहे हैं अब गांव में भी नहीं है, पापा कब आएंगे… आदि तमाम सवालों के जवाबों से मां रुबी निःशब्द दिखी और बेटे को दुलारती रही।

शहादत के बाद बेटे ने लिया जन्म
पुलवामा हमले में शहीद हुए प्रदीप सिंह की पत्नी नीरज देवी मौजूदा समय में कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में रहकर नौकरी कर रही हैं। उनके दो बेटियां 11 वर्षीय सुप्रिया और तीन वर्षीय सोना व बेटा प्रतीक हैं। वह कहती हैं कि पति बड़ी बेटी को सेना में अफसर बनाना चाहते थे। उनका सपना था कि उनकी तरह बेटी भी देश की सेवा करें, जबकि छोटी बेटी को प्रशासनिक सेवा में देखना चाहते थे।

पति के शहीद होने के बाद अब उनका सपना पूरा करना ही लक्ष्य है। नीरज बतातीं हैं कि हादसे के समय वह गर्भवती थीं। अगस्त में बेटे प्रतीक ने जन्म लिया। जब वो थे, तब बेटा नहीं था। मगर वो हमेशा कहते थे कि बेटा होने पर उसे फाइटर प्लेन का पायलट बनाएंगे। पति का सपना अधूरा नहीं रहेगा। नीरजा कहती हैं कि जब पति शहीद हुए थे तब जीने की इच्छा नहीं थी। उस दुख की घड़ी में समाज ने बहुत साथ दिया और एक ही सपना है कि बच्चों को सफल बनाकर पति को सपनों को साकार करना है।

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