बिहार उपचुनावः जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाय परिवार को दी जा रही तरजीह…

बिहार उपचुनावः जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाय परिवार को दी जा रही तरजीह…

पटना|बिहार में एक लोकसभा और पांच विधानसभा सीटों पर हो रहे उपचुनाव में लगभग सभी दलों ने जमीनी कार्यकर्ताओं के बजाय परिवार को तरजीह दी है। वैसे तो सभी राजनीतिक दल जमीनी कार्यकर्ताओं को महत्व देने की बात करते हैं लेकिन चुनाव के समय इससे अलग फैसला लेने से तनिक भी गुरेज नहीं करते। अगर बात करें इस बार के उपचुनाव की तो राजनीतिक दलों ने पुत्र, मां, पत्नी, पति और भाई को उम्मीदवार बनाकर दांव खेल दिया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के घटक लोजपा ने समस्तीपुर संसदीय सीट से पार्टी के सांसद रहे रामचंद्र पासवान के निधन से रिक्त हुई सीट पर उनके पुत्र प्रिंस राज पासवान पर भरोसा जताते हुए उम्मीदवार बनाया है। प्रिंस के पिता केंद्रीय मंत्री एवं लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान के छोटे भाई थे। वहीं इसी सीट से कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री बालेश्वर राम के विधायक पुत्र डॉ. अशोक राम को चुनावी मैदान में उतारा है। इस वर्ष संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में भी डॉ. राम को कांग्रेस ने इस सीट से उम्मीदवार बनाया था लेकिन उन्हें लोजपा के रामचंद्र पासवान से हार का सामना करना पड़ा था।

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