बेहमई कांड : 39 साल बाद भी न्याय की देवी पर लगी फैसले की टकटकी

बेहमई कांड : 39 साल बाद भी न्याय की देवी पर लगी फैसले की टकटकी

– डकैत से सांसद बनी फूलन देवी ने किया था नरसंहार, 20 लोगों की हुई थी हत्या
– हाल ही में पांच बार फैसले की लगी तारीखें, पर नहीं आ सकता फैसला
– कानपुर देहात की दस्यु प्रभावित कोर्ट में चल रहा है मुकदमा, जेल में हैं एक अभियुक्त

कानपुर, 14 फरवरी। कानपुर देहात जनपद के यमुना नदी के किनारे बसे बेहमई गांव में प्यार के दिन (वेलेंटाइन डे) आज से ठीक 39 साल पहले 14 फरवरी को नफरत की इंतिहा पार की गयी थी। तत्कालीन दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने अपने दर्जनों सहयोगियों के साथ खूनी नरसंहार किया था और बेहमई के क्षत्रिय बिरादरी के 20 लोगों की हत्या कर दी गयी थी। हत्या का खौफ कहें या और कुछ, 2011 तक हत्याकांड से संबंधित मुकदमें का कोर्ट में ट्रायल नहीं हुआ। कोर्ट में मुकदमा ट्रायल होने के बाद बीते दो माह से उम्मीद जगी थी कि अब किसी भी समय फैसला आ जाएगा पर तारीख पर तारीख पड़ती ही जा रही है। 12 फरवरी को फैसला आने के दौरान एक बार फिर फैसले की तारीख 26 फरवरी कर दी गयी और दो माह में पांच बार फैसले की तारीख बढ़ गयी है। इसके बावजूद 39 साल बाद भी मुकदमें के वादकारी न्याय की देवी पर फैसले की टकटकी लगाये हुए हैं।


सिकंदरा थानाक्षेत्र स्थित बेहमई गांव में 39 साल पूर्व 14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी, मुस्तकीम, राम औतार व लल्लू गैंग में शामिल 35-36 डकैतों ने हमला बोला। गांव में लूटपाट के साथ जमकर तंडाव करते हुए डकैतों ने गांव के 20 लोगों को एक लाइन में खड़ाकर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाते हुए मौत के घाट उतार दिया था। इस नरसंहार के दौरान छह लोग घायल भी हो गए थे। डकैतों के नरसंहार के बाद राजाराम सिंह ने मुकदमा दर्ज कराया था।

24 अगस्त 2012 में पांच अभियुक्तों भीखा, पोसे उर्फ पोसा, विश्वनाथ उर्फ पुतानी उर्फ कृण स्वरूप, श्याम बाबू व राम सिंह के खिलाफ आरोप तय होने पर न्यायालय में ट्रायल शुरु हुआ। पांचों आरोपितों में से पोसा व राम सिंह को जेल भेजा गया था। दोनों आरोपियों में 13 फरवरी 2019 को जिला कारागार में राम सिंह को मौत हो गई थी। जबकि भीखा, विश्वनाथ उर्फ पुतानी उर्फ कृष्ण स्वरूप व श्याम बाबू जमानत के बाद से फरार चल रहें हैं। वर्तमान समय में बुजुर्ग पोसा ही जेल में है और वह भी फैसले का इंतजार कर रहा है।

छह जनवरी से 26 फरवरी तक सिर्फ मिली तारीखें
दस्यु प्रभावित की विशेष न्यायालय 19 दिसम्बर 2019 को केस से जुड़े सभी पक्षों की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था और छह जनवरी 2020 को फैसला सुनाए जाने की संभावना थी। छह जनवरी दस्तावेजों की कमी के चलते न्यायालय ने फैसला टाल दिया और 18 तारीख तय की गई। 18 जनवरी को न्यायालय ने पत्रावली में मुख्य केस डायरी न उपलब्ध कराने जाने पर अगली तारीख 24 जनवरी कर दी। इस दिन भी न्यायालय को केस की आख्या नहीं मिल सकी जिसके बाद न्यायालय ने चौथी तारीख 30 जनवरी तक के लिए फैसला टाल दिया।

30 जनवरी को भी फैसला नहीं आ सका और 12 फरवरी तारीख मुकर्रर की गयी। 12 फरवरी को हुई सुनवाई में एक बार फिर केस डायरी को पुलिस ने कोर्ट में नहीं पेश किया जिससे न्यायालय ने अगली तारीख 26 फरवरी कर दी। इसके साथ ही जिल के कप्तान को सख्त निर्देश दिया कि फैसले से दो दिन पहले ही केस डायरी न्यायालय में उपस्थित हो जाना चाहिये।

नरसंहार की बरसी पर फैसले की थी उम्मीद
वादकारी राजाराम सिंह का कहना है कि हमें न्याय की देवी पर पूरा भरोसा है पर तारीख पर तारीख पड़ने से निराशा हाथ लगती है। उन्होंने कहा कि देश के इस बड़े नरसंहार के फैसले का इंतजार बेहमई गांव ही पूरा देश इंतजार कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की लापरवाही के चलते न्याय आने में देरी हो रही है। आगे कहा कि हमें उम्मीद थी कि नरसंहार की बरसी पर फैसला आ जाएगा और आज के दिन पूरा गांव भी उम्मीद लगाये हुए था।

जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि जिले के कप्तान ने भरोसा दिलाया है कि मूल केस डायरी समय से पहले जमा कर दी जाएगी और ऐसे में संभावना है कि 26 फरवरी को बेहमई कांड का फैसला आ सकेगा।
2011 में केस का हुआ था ट्रायल
सरकारी वकील राजू पोरवाल ने बताया कि 2011 में जब ट्रायल शुरु हुआ था तब पांच आरोपी थे, जिसमें से एक आरोपी की जेल में ही मौत हो गयी थी और जिस दिन घटना हुई थी, उस दिन दर्ज एफआईआर में पुलिस ने चार गैंग फूलनदेवी, राम औतार, मुस्तकीम और लल्लू गैंग और 35-36 डकैतों को आरोपी बनाया था।

सरकारी वकील ने बताया कि आरोप पत्र दाखिल होने के बाद कभी सारे आरोपी एक साथ अदालत में हाजिर नहीं हो पाए इस वजह से ट्रायल नहीं शुरु हो पाया। उन्होंने बताया कि, अब चार आरोपी बचे हैं, जिसमें तीन आरोपित भीखा, श्यामबाबू और विश्वनाथ जमानत पर हैं जबकि पोसा जेल में है और उनके लिए फैसला आने वाला है। कहा कि केस के ट्रायल के दौरान कुल 15 गवाहों ने अपनी गवाही दी है। बताया कि पूरी संभावना है कि 26 फरवरी को फैसला आ सकेगा।

न्यायालय का फैसला होगा मान्य
डकैतों के वकील गिरीश चन्द्र दुबे रघुनंदन सिंह का कहना है कि प्ररकण में जो मुख्य आरोपी थे, उनकी मौत हो चुकी है और कुछ हाजिर भी नहीं हुए। जो चार लोग बचे हैं, ये दोषी नहीं है, क्योंकि जो विश्वनाथ है वो घटना के वक्त नाबालिग थे और जो लोग हैं वो मुख्य आरोपी नहीं थे। बाकी न्यायालय जो भी फैसला देगा वो मान्य होगा।

23 आरोपियों पर चला केस
हत्याकांड के वादी राजाराम सिंह, जंटर सिंह, राजू सिंह और देवदत्त ने बताया कि अलग-अलग समय में कोर्ट में कुल 23 आरोपियों पर केस चला। जिसमें मुख्य फूलन देवी रही और केस से जुडे 16 आरोपियों की मौत हो चुकी है। 23 आरोपितों में जालौन जनपद के रहने वाले आरोपित मान सिंह, रामकेश, विश्वनाथ उर्फ अशोक फरार चल रहे हैं। सिर्फ एक आरोपी पोसा ही जेल में है। राजाराम का कहना है कि हमें उम्मीद थी कि कोर्ट आरोपियों को जरुर सजा देगा, लेकिन बार-बार तारीखें बढ़ने से निराशा होती है।

मल्लाह परिवार में हुआ था फूलन देवी का जन्म
10 अगस्त 1963 को उत्तर प्रदेश के जालौन के घूरा का पुरवा गांव में फूलन देवी का जन्म एक मल्लाह परिवार में हुआ था। फूलन देवी का बचपन बेहद गरीबी में बीता था लेकिन वो बचपन से ही दबंग थीं। 10 साल की उम्र में जब उन्हें पता चला कि चाचा ने उनकी जमीन हड़प ली है तो चचेरे भाई के सिर पर ईंट मार दी थी। फूलन के घरवाले उनकी इस हरकत से इतना नाराज हो गए थे कि महज 10 साल की उम्र में 25 साल बड़े आदमी से शादी कर दी थी।

शादी के बाद उनके पति ने रेप किया, धीरे-धीरे फूलन की तबीयत इतनी बिगड़ गई कि उन्हें मायके आना पड़ गया। इसके बाद फूलन डाकू बन गयी और घटना को अंजाम दिया। इसी घटना से वह चर्चा में आयी और समर्पण के बाद उत्तर प्रदेश की मिर्जापुर सीट से सपा से सांसद बनी।

दिल्ली में फूलन देवी की हुई थी हत्या
बेहमई कांड के बाद बाद फूलन देवी ने मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने सरेंडर कर दिया था। मीरजापुर से लोकसभा की सांसद चुने जाने के पहले वह काफी दिनों तक ग्वालियर और जबलपुर जेल में रहीं। साल 2001 में शेर सिंह राणा नाम के व्यक्ति ने दिल्ली में फूलन देवी के घर के बाहर ही उनकी हत्या कर दी थी।

इनकी हुई थी हत्या
जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि 14 फरवरी 1981 को दस्यु सुंदरी फूलन देवी के गिरोह ने बेहमई गांव में धावा बोला था। इसके बाद जगन्नाथ सिंह, तुलसीराम, सुरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह, लाल सिंह, रामाधार सिंह, वीरेंद्र सिंह, शिवराम सिंह, रामचंद्र सिंह, शिव बालक सिंह, नरेश सिंह, दशरथ सिंह, बनवारी सिंह, हिम्मत सिंह, हरिओम सिंह, हुकुम सिंह समेत 20 लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी थी। वहीं जंटर सिंह समेत आधा दर्जन ग्रामीण गोली लगने से घायल हुए थे।

केस से जुड़े इन आरोपियों की हो चुकी है मौत
पुलिस रिकार्ड के अनुसार बेहमई कांड की प्रमुख आरोपी दस्यु सुंदरी फूलन देवी की नई दिल्ली में हत्या हो चुकी है। जालौन के कोटा कुठौंद के राम औतार, गुलौली कालपी के मुस्तकीम, बिरही कालपी के लल्लू बघेल, बलवान, कालपी के लल्लू यादव, कोंच के रामशंकर, डकोर कालपी के जग्गन उर्फ जागेश्वर, महदेवा कालपी के बलराम, टिकरी के मोती, चुर्खी के वृंदावन, कदौली के राम प्रकाश, गौहानी सिकंदरा के रामपाल, मेतीपुर कुठौद के प्रेम, धरिया मंगलपुर के नंदा उर्फ माया मल्लाह की मौत हो चुकी है।

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