बैंक कमर्चारियों के वेतन के केस पर हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को किया तलब

बैंक कमर्चारियों के वेतन के केस पर हाईकोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को किया तलब

यूपी : बैंक कर्मचारियों के लिए कार्य करने वाली एक ट्रेड यूनियन वी बैंकर्स के द्वारा माननीय उच्च न्यायालय में बैंक कंर्मियो के वेतन को समझौता प्रक्रिया की जगह केंद्रीय व राज्य कर्मचारियों के तरह आयोग के दायरे में लाने की मांग के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय में रिट लगाई थी।

बता दे की बैंक कर्मचारियों का वेतन हर पाँच वर्ष में यूनियंस व भारतीय बैंक संघ के बीच वार्ता से होता है, पर वी बैंकर्स संगठन के द्वारा आरोप लगाए गए है कि इस प्रतिशत बढ़ोत्तरी के खेल की वजह से बैंक कर्मचारियों की तनख्वाह आज सबसे कम है एक नए क्लर्क की बेसिक सैलरी 11735 रुपये मात्र है क्योकि 9वे व 10वे द्विपक्षीय समझौते में मात्र 2.5 प्रतिशत की बेसिक में हुई बढोत्तरी से आज बैंक कर्मचारियों की तनख्वाह सबसे कम है।


जिसकी वजह से वी बैंकर्स ने मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) नई दिल्ली के पास एक औधोगिक विवाद लगाया गया जिसकी सुनवाई में भारतीय बैंक संघ , वित्त मंत्रालय सभी बैंके पार्टी थे और इस औधौगिक विवाद में कोई समझौता न हो पाने के कारण उप मुख्य श्रमायुक्त (केंद्रीय) कानपुर के द्वारा उक्त केस को भारत सरकार को ट्रिब्यूनल को सौपने के लिए भेज दिया गया था ।
आज हुई तारीख में माननीय उच्च न्यायालय ने भारत सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि पिछली तारीख में आपसे वी बैंकर्स के औधोगिक विवाद पर सरकार के द्वारा क्या निर्णय लिया गया है पूछा था जिस पर आज माननीय न्यायालय में भारत सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि वार्ता चल रही है.

इस वी बैंकर्स के सीनियर अधिवक्ता राधाकांत ओझा व आशुतोष श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि जब वी बैंकर्स के औधौगिक विवाद की समझौता कार्यवाही पूरी हो चुकी है तो अब वार्ता कहा हो रही है वी बैंकर्स के वेतन आयोग की मांग पर जिसका भारत सरकार के अधिवक्ता कोई जवाब नही दे पाये .

जिस पर माननीय न्यायालय ने अगली सुनवाई 22 अक्टूबर की तय की और निर्देश दिये की भारत सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री शशि प्रकाश सिंह को उपस्थित होने का निर्देश दिया है क्योकी भारत सरकार के अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह के द्वारा 2 तरीखों में भी सरकार के द्वारा वी बैंकर्स के औधौगिक विवाद में क्या निर्णय लिया गया नही बता पाये थे।

बैंक कमर्चारियों के वेतन समझौता नवम्बर 2017 से लंबित है और राष्ट्रीय स्तर पर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक्स यूनियंस व भारतीय बैंक संघ वार्ता के माध्यम से द्विपक्षीय समझौते के द्वारा वेतन निर्धारित करते है, अभी वेतन समझौते के अंतिम चरण में भी वार्ता का दौर जारी था और 15% कुल वृद्धि पर आपसी सहमति बनी है जिसमे से बेसिक वेतन पर मात्र 2.5% की वृद्धि पर सहमति बनी है जिसका वी बैंकर्स विरोध कर रहा है।

वी बैंकर्स ऑफिसर्स एसोसिएशन के महामंत्री राहुल मिश्रा तथा वी बैंकर्स एसोसिएशन के महामंत्री आशीष मिश्रा ने बताया की आज तक बैंकिंग सेक्टर में न तो पेंशन रिवीजन हुई है जिसकी वजह से रिटायर्ड बैंक कर्मचारियो की भी हालत खराब है और वर्तमान कर्मचारियों की भी तंख्वाह केंद्र व राज्य सरकार के कंर्मियो से बहुत ज्यादा कम है .

क्योकि हमारा वेतन RBI और सरकार न निर्धारित करके बिना रजिस्टर्ड बॉडी वाली भारतीय बैंक संघ तय करती है जबकि इसका कोई औचित्य ही नही है क्योकी बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में ये सारी पावर RBI को दी गयी है जबकि भारतीय बैंक संघ धीरे से RBI की जगह लेकर असवैधानिक संस्था मनमाने तरीके से बैंक कर्मियो के वेतन पेंशन पर शोषण कर रही है। अब अपने संगठन की बैंक कर्मियो के लिये वेतन आयोग की मांग के लिए न्यायिक रूप से संघर्ष जारी है।

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