बड़ी लापरवाहीः ब्रेन ट्यूमर के मरीज को डॉक्टर करते रहे टीबी और मिर्गी का इलाज…

बड़ी लापरवाहीः ब्रेन ट्यूमर के मरीज को डॉक्टर करते रहे टीबी और मिर्गी का इलाज…

बेंगलुरु|23 साल की अंजलि (बदला हुआ नाम) का तीन साल पहले मुंबई में डॉक्टरों ने टीबी और मिर्गी का इलाज किया था। पिछले साल उसकी तबीयत खरीब होने के बाद घरवाले उसे बेंगलुरु के सकरा वर्ल्ड हॉस्टिपल ले गए। जहां जांच के बाद उसे पता चला कि उसे टीबी नहीं था और ऐंटी-टीबी दवा वास्तव में उसके स्वास्थ्य को प्रभावित करती रही। यहां उसे ब्रेन ट्यूमर होने की बात पता चली और उसकी सर्जरी की गई। बेंगलुरु में अंजलि का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि गलत डायग्नॉसिस और गलत इलाज से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ा।

2015 में अंजलि मुंबई में रह रही थी। तभी उसे यहां पर रेयर टीबी की बीमार पैरिएटल ट्यूबरक्लोमा का पता चला। उसे ऐंटी-टीबी और मिर्गी-रोधी दवाएं दी जाने लगीं। उसकी कोई बायोप्सी नहीं की गई थी। उसकी ये दवाएं लगातार जारी रहीं लेकिन उसकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। उसका सिरदर्द बढ़ता गया। हालत बिगड़ती गई। उसे चलने और बोलने में भी समस्या होने लगी।
सितंबर 2018 के एक दिन वह बेंगलुरु में काम पर थी उसकी तबीयत खराब हुई। उसे यहां से सकरा हॉस्पिटल ले जाया गया। यहां जांच में पता चला कि उसके मस्तिष्क में एक ट्यूमर था। न्यूरोसर्जन डॉ. स्वरूप गोपाल और उनकी टीम ने तत्काल सर्जरी करके ट्यूमर हटाया। ट्यूमर के जमे हुए हिस्सा के टिशू लेकर जांच के लिए भेजा गया। जांच में पाया गया कि यह नियोप्लाज्म था जो आगे चलकर कैंसर हो सकता था।
हिस्टोपैथॉलजी और साइटोपैथॉलजी विशेषज्ञ डॉ. नंदिता घोषाल ने बताया, मरीज के पहले के रिकॉर्ड में इसे टीबी बताया गया था लेकिन यह टीबी नहीं था। यह एक दुर्लभ ट्यूमर है, जो मुख्य रूप से बच्चों, किशोरों और युवा वयस्कों को प्रभावित करता है। ज्यादातर मामलों में यह विशेष रूप से मस्तिष्क में होता है। इस ट्यूमर का जैविक व्यवहार अलग होता है और इसलिए यह बहुत ही रेयर माना जाता है।

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