लखनऊ: बसपा का दरवाजा बंद, सपा में इंट्री बैन और भाजपा में मना जश्न

लखनऊ। 23 मई की दोपहर करीब 12 बजे का वक्त। यूपी के सूबे की राजधानी लखनऊ का तापमान जेठ महीने के होने का एहसास करा रहा था। घरों में, दफ्तरों में और पार्टी कार्यालयों में लोग टीवी के सामने बैठे थे। मतगणना के रुझान देख रहे थे।

लगातार भाजपा की सीटों की बढ़त से भाजपा कार्यालय में जश्र मनाया जाने लगा था। ढोल और पटाखों में लोग नाच रहे थे। इसके विपरीत कांग्रेस कार्यालय में न गाडियों का काफिला था और न ही जनता का शोर। खामोशी सी छाई थी। बसपा के मुख्यालय का दरवाजा बंद था।

बसपा सुप्रीमो का आवास भी बंद था। सपा मुख्यालय में लोगों और प्रेस की इंट्री बैन कर दी गई थी। इस दफ्तर के चैकीदारों का कहना था कि उन्हें आदेश है कि किसी को अंदर न आने दें।

सुबह आठ बजे मतगणना शुरू होते ही पार्टी कार्यकर्ताओं ने जैसे-जैसे रुझान सुनना शुरू किया तो उनका मन घर में नहीं लगा। वे भाजपा मुख्यालय एकत्र होने लगे। ढोल और मंजीरों का इंतजाम हो गया। जब दोपहर को सूचना आई कि यूपी में 80 सीटों में से 56 सीटों पर भाजपा आग है तो जश्र मनाने से कोई उन्हें रोक नहीं पाया।

ढोल की आवाज ने टीवी के माइक को धीमा कर दिया। फिर वही पुराने नारे गूंजने लगे- हर हर मोदी- घर घर मोदी। पटाखे छूटने लगे। चमकीले कागज की फुहारें बरसाई जाने लगीं। युवा नाचते और फिर वहां मौजूद कैमरा मेनों के बीच जाकर अपनी टिप्पणी अपने आप देने लगते। धीरेन्द्र चैहान ने कहा कि मोदी को लाना है कांग्रेस को भगाना है। इस प्रकार के स्लागन और टिप्पणियां करने के बाद कार्यकर्ता नाचने लगते।

पार्टी कार्यालय में सभी पदाधिकारियों, विधायकों और नेताओं की बैठक दोपहर से बुलाई गई थी। सो उन्होंने आना शुरू कर दिया। मालएवेन्यू स्थित नेहरू भवन कांग्रेस कार्यालय सन्नाटा था। वहां दो चार वाहन खड़े थे लेकिन लोगों की संख्या बहुत कम थी। जो लोग थे भी वे टीवी के आगे बैठकर यह चर्चा करने में लगे थे कि उन्हें तो मालूम था कि मोदी ने क्या किया है। इसके आगे बसपा का दफ्तर है। वह दफ्तर बंद था।

उसके बगल में सुप्रीमो मायावती का आवास दिखा। यह विशाल आवास भी बंद था। वहां स्क्यिोरिटी ने बताया कि मैडम किसी से मिलेंगी नहीं। कार्यालय में तो यह जवाब देने वाला भी कोई नहीं था। इसके बाद पत्रिका टीम सपा कार्यालय पहुंची। सपा कार्यालय में भी सन्नाटा था, लेकिन यहां खास बात तो यह थी कि इस कार्यालय में मीडिया से लेकर आम कार्यकर्ता के प्रवेश पर रोक लगी हुई थी। जिम्मेदारों ने यह रोक लगाई थी।

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