लगता है बीमा कंपनियों का ही बीमा कराना पड़ेंगा,घाटा..घाटा..घाटा..!

लगता है बीमा कंपनियों का ही बीमा कराना पड़ेंगा,घाटा..घाटा..घाटा..!

चिंगारी कोई भड़के तो सावन उसे बुझाए..सावन जो अगन लगायें उसे कोन बुझाए…लगता है ऐसा ही कुछ सरकारी बीमा कंपनियों के साथ हो रहा है। औरो का बीमा करानेवाली तीन बीमा कंपनियाँ नेशनल, ओरिएंटल और यूनाईटेड बीमा कंपनियों ने इस वर्ष करीब ४२०० करोड़ का घाटा किया है। जब की निजी क्षेत्र की बीमा कंपनियों ने मुनाफा किया है। सरकारी टेलिफोन कम्पनी बीएसएनएल घाटे में बताई जा रही है। विमान बनानेवाली हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स कम्पनी भी घाटे में। एयर इंडिया विमानी सरकारी कम्पनी भी घाटे में। जानीमानी जेट एयरवेज एयरलाइन्स कम्पनी बंद हो गई। निजी कम्पनी jio धमाधम आगे बढ़ रही है। सरकारी कम्पनियां घाटे में चल रही है। निजी कम्पनी मुनाफा कर रही है। और कोई कह रहा है की २०३० तक भारत १० ट्रिलियन अर्थतंत्र वाला देश बनेंगा। नाना पाटेकर की अदा में कहे तो अच्छा है….लेकिन अब का क्या….? सरकारी कम्पनियां यदि ४-४ हजार करोड़ का घाटा करेंगी तो १० ट्रिलियन तो क्या ५ ट्रिलियन वाला देश भी न जाने कब बनेंगा….? देश के अर्थतंत्र के बारे में विशेषग्य न जाने क्या क्या कह रहे है। उसका खुलासा वित्त मंत्री को करना चाहिए। आखिर ये बाते सिर्फ बाते ही है या कटु सच….?
२०१८ के साल में ये तीन सरकरी कम्पनियो ने मुनाफा किया। फिर ऐसा क्या हो गया की ४ हजार करोड़ से ज्यादा का घाटा हो गया..? क्या लोगो ने बीमा कराना कम कर दिया या बंद कर दिया…? अन्य सरकारी निगम भी घाटे में चल रहे है। जिओ दे दनादन चल रहा है और बीएसएनएल घाटे में…भाई शाब बही लगता ऐसा बीएसएनएल के बारे में कहा जाता था। अब ये कह रहे है की भाई साब नहीं चलता…! निजी कंपनी भी वही धंधा कर रही है जो बीएसएनएल कर रही है। फिर भी सरकारी कंपनी घाटे में और निजी सब से आगे….! क्या इसका रिसर्च नहीं होना चाहिए क्या….? सरकारी कंपनी को घाटे में डालने क लिए क्या किसी बड़े अफसरों को जिम्मेवार ठहराया गया….? इन सवालों के जवाब तो है लेकिन मिलेंगे नहीं।
कई सरकारी बैंके घाटे में चल रही थी। सरकार ने कुछ बैंको को एक दुसरे में विलय कर सरकारी बैंके कम कर दी और खर्चा भी बचाया। वैसे ही सरकारी तीन बीमा कंपनिया जो घाटे में है उसे अन्य बीमा कम्पनियोँ में विलय कर घाटे में से बाहर लाना होंगा। एयर इंडिया विमान कंपनी को चलाने के लिए अरबो और खरबों का खर्च हो रहा है। फिर भी वह चल रही है। उसे चलाने के लिए करदाताओं के पैसे का उपयोग हो रहा है। जहा तक सरकारी बीमा कमपनियो का सवाल है सरकार को इसकी जांच करानी चहिये। विदेश की तरह भारत में भी सभी चीजो का बीमा कराने की आदत लोगो में डालनी होंगी। ताकि बीमा कम्पनी का कामकाज बढे और घाटे में से बाहर आये। विदेश में तो छोटो छोटी बातो में बीमा होता है। ऐसा ही कुछ भारत में…नए भारत में होना चाहिए। तो ही ये तीन घाटेवाली कम्पनिया को काम मिलेंगा और लोगो को सुरक्षा। दूसरो का बीमा कराने वाली कम्पनी का ही बीमा कराना न पड़े…! सरकार उनके कामकाज पर विशेष ध्यान केन्द्रित करे तो ये बीमा कम्पनियां घाटे से निकल कर मुनाफे की राह पर जुग जुग चल सके जिओ के संग…! बढे चलो….बढे चलो…ओ मितवा….!!

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