J&K: बुरहान वानी की बरसी पर नहीं मना मातम, कश्मीर में दिखी शांति

J&K: बुरहान वानी की बरसी पर नहीं मना मातम, कश्मीर में दिखी शांति

श्रीनगर|8 जुलाई का दिन कश्मीर के लिए कुछ अलग मायने रखता है। इसी दिन 2016 में आतंकी बुरहान वानी को सुरक्षाबलों ने मार गिराया था, और उसके बाद से तीन साल तक घाटी में कई शरारती तत्व बुरहान वानी की सहानभूति के नाम पर युवाओं को भडक़ाने और उन्हे आतंकी बनाने का काम कर रहा था। खासकर 8 जुलाई के दिन बड़ी तादाद में कश्मीर के अलग-अलग इलाकों में युवा इक_ा हो जाते, जिसके बाद वो पत्थरबाजी करते और सुरक्षाबलों पर हमला करते।
8 जुलाई 2016 को बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद घाटी में जगह-जगह हिंसा फैलने लगी और पत्थरबाजी होने लगी। उसके अगले ही दिन से एक दिन में पत्थरबाजी और हिंसा की घटनाएं 15 तक पहुंच गई जो कि इससे पहले इक्का दुक्का होती थी। महज एक साल के भीतर आतंकी संगठनों, सोशल मीडिया और फिल्मों के जरिए बुरहान वानी को कश्मीर में शहादत का चेहरा पेश करने की कोशिश कर रहा था। इसके पीछे मकसद यही था कि घाटी में आतंकवाद की आग हमेशा जलती ही रहे।
8-10 जुलाई तक दक्षिण कश्मीर में हिंसा का ऐसा दौर चला जो कि नब्बे दशक के बाद पहली बार देखा गया। महज 3 दिन में दक्षिण कश्मीर के सिर्फ त्राल में ही पत्थरबाजी की 35 घटनाएं हुई और कई जगह सुरक्षाबलों की चौकियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी की गई।
इसके एक साल बाद 8 जुलाई 2018 को एक बार फिर दक्षिण कश्मीर के इलाकों में हिंसा का दौर देखा गया, लेकिन इस बार पूरे दक्षिण कश्मीर में करीब 20 पत्थरबाजी की घटना हुई। लेकिन 8 जुलाई 2019 को कश्मीर में ऐसा हुआ जो पहले कभी नहीं हुआ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *